Search Method of __________Bhagwadgita 1 to 18 Adhyay any shlok, 1 to108 Upnishad, 1 to196 Patanjali sutra, 1 to 18 Purana---- *Examples for search method (KEY WORDS ARE AS BELOW.......)---------------------------------------------------- 18.77 , 196) Upnishad , Patanjali Sutra 196 , Puranas , Shashra , 4 Vedas




18महापुराण

18 ग्रंथों में ब्रह्मा, पद्म, विष्णु, शिव, भागवत, नारद, मार्कंडेय, अग्नि, भविष्य, ब्रह्मवैवर्त, लिंग, वराह, स्कंद, वामन, कूर्म, मत्स्य, गरुड़ और ब्रह्माण्ड शामिल हैं। इन पुराणों में अनेक विषयों से संबंधित विश्वकोशीय जानकारी समाहित है।

1. ब्रह्म पुराण 

2. पद्म पुराण 

3. विष्णु पुराण 

4. शिव पुराण 

5. वामन पुराण 

6. मार्कण्डेय पुराण 

7. वराह पुराण 

8. अग्नि पुराण 

9. कूर्म पुराण 

10. भागवत महापुराण 

11. लिंग पुराण 

12. नारद पुराण 

13. स्कंद पुराण 

14. गरुड़ पुराण

15. मत्स्य पुराण 

16. वायु पुराण 

17. भविष्य पुराण 

18. ब्रह्माण्ड पुराण (अपूर्ण) 



108 उपनिषद

1. ईसा*

2. केना*

3. कथा*

4.प्रश्न*

5. मुंडा*

6. माण्डूक्य*

7. तैत्तिर*

8. ऐतरेय*

9. छान्दोग्य*

10. बृहदारण्यक*

11. ब्रह्मा

12. कैवल्य

13. जबला

14. श्वेताश्व

15. हम्सा

16. आरुणि

17. गर्भ

18. नारायण

19. परमहंस

20. अमृतबिंदु

21. अमृतानंद

22.अतह्रवसिरः

23. अथर्वशिखा

24. मैत्रायिनी

25. कौषीतकीब्राह्मण

26. बृहज्जाबाला

27. नृसिंहतापिनी

28. कालाग्निरुद्र

29. मैत्रेय

30. सुबाला

31. क्षुरिका

32. मांत्रिक

33. सर्वसार

34. निरालाम्बा

35. शुक्रहस्य

36. वज्रसूचिका

37. तेजोबिंदु

38. नादबिंदु

39. ध्यानबिंदु

40. ब्रह्मविद्या

41. योगतत्त्व

42. आत्मबोध

43. नारदपरिव्राजक

44. त्रिसिखी

45. सीता

46. योगचूड़ामणि

47. निर्वाण

48. मंडलब्राह्मण

49. दक्षिणामूर्ति

50. सराभा

51. स्कंद

52. त्रिपादविभूति-महानारायण

53. अद्वयतारका

54. रामरहस्य

55. रामतापानी

56. वासुदेव

57. मुद्गला

58. सांडिल्य

59. पिंगला

60. भिक्षु

61. महत

62. सरिरका

63. योगशिखा

64. तुरीयतिता

65. संन्यास

66. परमहंसपरिव्राजक

67. अक्षमालिका

68. अव्यक्त

69. एकाक्षर

70. अन्नपूर्णा

71. सूर्य

72. अक्षी

73. अध्यात्म

74. कुण्डिका

75.सावित्री

76. आत्मा

77. पसुपता

78. परब्रह्म

79. अवधूतक

80. त्रिपुरतापिनी

81. देवी

82. त्रिपुरा

83. कथारुद्र

84. भावना

85. रूद्रहृदय

86. योग-कुण्डली

87. भस्म

88. रुद्राक्ष

89. गणपति

90. दर्शन

91. तारासरा

92. महावाक्य

93. पंचब्रह्म

94. प्राणाग्निहोत्र

95. गोपालतापिनी

96. कृष्ण

97. याज्ञवल्क्य

98. वराह

99. सत्यायनि

100. हयग्रीव

101.दत्तात्रेय

102. गरूड़

103. कालीसमतरना

104. जाबालि

105. सौभाग्यलक्ष्मी

106.सरस्वतीरहस्य

107. बहवृचा

108. मुक्तिका

उपनिषद आध्यात्मिक ज्ञान और आत्मज्ञान की बात करते हैं। वे इस बारे में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं कि ज्ञान कैसे प्राप्त किया जाए जो जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति या मुक्ति प्रदान कर सके। उपनिषद इस बारे में बात करते हैं कि ध्यान के माध्यम से आत्मा को ब्रह्म (अंतिम सत्य) के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है।

#####################


Comments

Popular posts from this blog

IMP VANSH: RAJ VANSH ( FROM JANAMEJAYA TO 1947 INDEPENDENCE)

Ancient Names of Modern Countries in Sanskrit

VEDAS & SCIENCE