DR HEDGEWAR
1889 की एक घटना: साल 1889 की बात है। एक नन्हा बालक, जिसने हाल ही में स्कूल जाना शुरू किया था, विद्यालय से बाहर निकला और अपने छोटे-छोटे हाथों से स्कूल में बाँटी गई मिठाइयों को उठाकर नाली में फेंक दिया। यह मिठाइयाँ किसी साधारण अवसर पर नहीं, बल्कि ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के राजतिलक की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में बाँटी गई थीं। अंग्रेज शासकों ने यह सोचा था कि भारतीय बच्चे इस अवसर को आनंद और खुशी से मनाएँगे, परंतु इस बालक ने गुलामी की इस मिठाई को ठुकरा दिया। उसकी छोटी-छोटी आँखों में एक अटूट आत्मसम्मान था, एक अस्वीकार भाव था विदेशी शासन के प्रति। बंदे मातरम् पर प्रतिबंध और उस बालक की हिम्मत: ब्रिटिश सरकार ने भारतीय स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ गाने पर रोक लगा दी थी। ब्रिटिश अधिकारियों को यह गीत सहन नहीं था, क्योंकि यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन चुका था। परंतु यह नन्हा बालक किसी भी अंग्रेज अधिकारी को देखते ही जोर-जोर से ‘वंदे मातरम्’ गाने लगता। उसकी यह निडरता और स्वतंत्रता के प्रति जुनून देख ब्रिटिश अधिकारियों को गुस्सा आ गया। स्कूल के अध्यापक और प्रशासन भी डर गए कि यह...